भाद्रपद के शुक्लपक्ष की पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत होती है। हमारे पितृ 15 दिन के लिए हमारे घर में रहते हैं। श्राद्ध कर्म करने से वो प्रसन्न होते हैं। श्राद्ध कर्म पूरे विधि विधान से करना चाहिए नहीं तो पितृ नाराज हो जाते हैं। इस दिन ब्राम्हणों को दान देना चाहिए। इन सबके अलावा कुत्ते और विशेषकर कौए को भोजन का एक अंश अवश्य देना चाहिए। श्राद्ध की तिथियां होती हैं। एक विशेष तिथि को विशेष प्रकार से मृत्यु पाए लोग के श्राद्ध की निश्चित तिथि होती है
जिस
तिथि में आपके
पूर्वज का देहावसान हुआ
है उसी तिथि
पर श्राद्ध कर्म
करते हैं। यदि
तिथि भूल गयी
हो तो अमावस्या का
दिन सबसे उपयुक्त माना
गया है। इस
दिन सर्व पितृ
श्राद्ध योग होता है।
वर्ष 2018 की श्राद्ध की तिथियां
- 24 को पूर्णिमा का श्राद्ध
- 25 सितम्बर को प्रतिपदा: प्रतिपदा के दिन नाना नानी का श्राद्ध करते हैं। यदि नाना नानी की मृतयु तिथि ज्ञात न हो तो भी इसी तिथि को श्राद्ध करते हैं। ऐसा करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
- 26 सितम्बर द्वितीया श्राद्ध
- 27 को तृतीया
- 28 सितम्बर को चतुर्थी: आत्महत्या से दिवंगत लोगों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि में करते हैं। हथियार से मौत या दुर्घटना से मरे लोगों का श्राद्ध चतुर्दशी तिथि में करते हैं।
- 29 पंचमी: जो लोग अविवाहित सामान्य मृत्यु पाते हैं उनका श्राद्ध पंचमी को करते है। अविवाहित जन जो एक्सीडेंट में मरते हैं उनका भी पंचमी को ही श्राद्ध करेंगे।
- 30 को खष्ठी
- 1 अक्टूबर को सप्तमी श्राद्ध
- 2 अक्टूबरअष्टमी: पिता का श्राद्ध अष्टमी को करते हैं।
- 3 अक्टूबर नवमी: माता का श्राद्ध नवमी को करते हैं। महिलाओं के श्राद्ध की सर्वोत्तम तिथि है। किसी भी महिला का श्राद्ध इस दिन करते हैं।
- 4. अक्टूबर दशमी
- 5.अक्टूबर एकादशी: परिवार में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सन्यास ले लिये होते हैं और उनकी मृत्यु हो जाती है। ऐसे लोगों का श्राद्ध एकादशी और द्वादशी तिथियों में करते हैं।
- 6. अक्टूबर द्वादशी: इस दिन भी परिवार के लोग जो सन्यास लेके मरे हैं उनका श्राद्ध करते हैं।
दिनांक 7 अक्टूबर को त्रयोदशी और चतुर्दशी दोनों श्राद्ध रहेगा। परिवार में जिनकी अकाल मृत्यु हो जाती है उनका श्राद्ध इस दिन होता है। गोली या धारदार हथियार से मौत पाने वालों का भी श्राद्ध इसी दिन होता है। आत्महत्या से मरने वालों का भी श्राद्ध चतुर्दशी को ही होगा।
·
दिनांक
8 अक्टूबर को सर्वपितृ
अमावस्या अर्थात सबका श्राद्ध
रहेगा। इसे पितृ
विसर्जन भी कहते
हैं। जिनको अपने
पितरों की तिथि
याद न हो
या किसी कारण
वश उस तिथि
को श्राद्ध न
कर पाए हों
तो वो पितृ
अमावस्या के दिन
श्राद्ध करेंगे।
ज्योतिष में पितृदोष का
बहुत महत्व माना जाता है। प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में पितृदोष सबसे बड़ा दोष माना गया
है। इससे पीड़ित व्यक्ति का जीवन अत्यंत कष्टमय हो जाता है। जिस जातक की कुंडली में
यह दोष होता है उसे धन अभाव से लेकर मानसिक क्लेश तक का सामना करना पड़ता है। पितृदोष
से पीड़ित जातक की उन्नति में बाधा रहती है।
आमतौर पर पितृदोष के लिए खर्चीले
उपाय बताए जाते हैं लेकिन यदि किसी जातक की कुंडली में पितृ दोष बन रहा है और
वह महंगे उपाय करने में असमर्थ है तो भी परेशान होने की कोई बात नहीं।
पितृदोष का प्रभाव कम करने के लिए ऐसे कई आसान, सस्ते व सरल उपाय भी हैं जिनसे इसका प्रभाव कम हो सकता है।
पितृदोष का प्रभाव कम करने के लिए ऐसे कई आसान, सस्ते व सरल उपाय भी हैं जिनसे इसका प्रभाव कम हो सकता है।
1. कुंडली में पितृ दोष बन रहा हो तब जातक को घर की दक्षिण दिशा
की दीवार पर अपने स्वर्गीय परिजनों का फोटो लगाकर उस पर हार चढ़ाकर रोजाना उनकी पूजा
स्तुति करना चाहिए। उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
2. अपने स्वर्गीय परिजनों की निर्वाण तिथि पर जरूरतमंदों अथवा गुणी
ब्राह्मणों को भोजन कराए। भोजन में मृतात्मा की कम से कम एक पसंद की वस्तु अवश्य बनाएं।
3. इसी दिन अगर हो सके तो अपनी सामर्थ्यानुसार गरीबों को वस्त्र
और अन्न आदि दान करने से भी यह दोष मिटता है।
4. पीपल के वृक्ष पर दोपहर में जल, पुष्प, अक्षत, दूध, गंगाजल,
काले तिल चढ़ाएं और स्वर्गीय परिजनों का स्मरण कर उनसे आशीर्वाद मांगें।
5. शाम के समय में दीप जलाएं और नाग स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र
या रुद्र सूक्त या पितृ स्तोत्र व नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें। इससे भी पितृ दोष की
शांति होती है।
6. सोमवार प्रात:काल में स्नान कर नंगे पैर शिव मंदिर में जाकर
आक के 21 पुष्प, कच्ची लस्सी, बिल्वपत्र के साथ शिवजी की पूजा करें। 21 सोमवार करने
से पितृदोष का प्रभाव कम होता है।
7. कुंडली में पितृदोष होने से किसी गरीब कन्या का विवाह या उसकी
बीमारी में सहायता करने पर भी लाभ मिलता है।
8. पवित्र पीपल तथा बरगद
के पेड़ लगाएं। विष्णु भगवान के मंत्र जाप, श्रीमद्भागवत गीता का पाठ करने से भी पित्तरों
को शांति मिलती है और दोष में कमी आती है।
9. पितरों के नाम पर गरीब विद्यार्थियों की मदद करने तथा दिवंगत
परिजनों के नाम से अस्पताल, मंदिर, विद्यालय, धर्मशाला आदि का निर्माण करवाने से भी
अत्यंत लाभ मिलता है।
10. अपने घर में नर्मदेश्वर शिव लिंग स्थापित करें।
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आचार्य विकास मल्होत्रा
लाल किताब एस्ट्रो सेंटर (LKAC)
Lalkitabastro.com और lalkitabastrocentre.com पर जाकर फोन या व्यक्तिगत परामर्श बुक करें।
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